सीधा जवाब: भेंगापन अपने आप ठीक नहीं होता। बच्चे में जितनी जल्दी इलाज शुरू हो, कमज़ोर आँख की रोशनी उतनी ज़्यादा बचाई जा सकती है। इलाज चश्मे, पट्टी, व्यायाम और ज़रूरत पड़ने पर ऑपरेशन से होता है — और आयुष्मान कार्ड से यह ऑपरेशन मुफ़्त है।
भेंगापन, जिसे तिरछी आँख या अंग्रेज़ी में स्ट्रैबिस्मस (Squint) कहते हैं, तब होता है जब दोनों आँखें एक ही दिशा में नहीं देखतीं। एक आँख अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे की तरफ़ मुड़ जाती है — कभी हर वक़्त, तो कभी सिर्फ़ तब जब बच्चा थका हो या बीमार हो।
यह सिर्फ़ देखने में अजीब लगने की बात नहीं है
जब दोनों आँखें अलग-अलग दिशा में देखती हैं, तो दिमाग़ तक दो अलग तस्वीरें पहुँचती हैं। दो-दो दिखने से बचने के लिए दिमाग़ एक तस्वीर को बंद कर देता है। आँख सही रहती है, पर उस आँख तक रोशनी पहुँचाने वाला रास्ता बनना रुक जाता है। इसी को सुस्त आँख (lazy eye) कहते हैं।
बच्चा जितना छोटा होगा, इलाज से उतनी ज़्यादा रोशनी वापस आ सकती है। एक उम्र के बाद यह नुकसान पक्का हो जाता है — फिर न चश्मा, न ऑपरेशन उसे लौटा सकता है। इसीलिए "बड़ा होकर ठीक हो जाएगा" वाली सलाह बच्चों की रोशनी छीन लेती है।
किन बातों पर ध्यान दें
- एक आँख का अंदर, बाहर, ऊपर या नीचे मुड़ना — कभी-कभी भी
- देखने के लिए सिर टेढ़ा करना या एक तरफ़ घुमाना
- तेज़ धूप या रोशनी में एक आँख बंद कर लेना
- दूरी का अंदाज़ा न लगा पाना, चीज़ों से टकराना
- दो-दो दिखने या पढ़ते वक़्त अक्षर आपस में मिलने की शिकायत
- टीवी के बहुत पास बैठना या किताब आँखों से सटाकर पढ़ना
इलाज कैसे होता है
चश्मा
कई बार भेंगापन आँख के नंबर की वजह से होता है, ख़ासकर दूर के नंबर की। सही चश्मा लगते ही कुछ बच्चों की आँखें अपने आप सीधी हो जाती हैं और आगे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
पट्टी और व्यायाम
अगर कमज़ोर आँख की रोशनी कम होने लगी है, तो अच्छी आँख पर पट्टी बाँधी जाती है ताकि कमज़ोर आँख को काम करना पड़े। साथ में आँखों के व्यायाम दोनों आँखों को मिलकर काम करना सिखाते हैं।
ऑपरेशन
जहाँ चश्मे और पट्टी से बात नहीं बनती, वहाँ ऑपरेशन से आँख घुमाने वाली मांसपेशियों का खिंचाव ठीक किया जाता है ताकि दोनों आँखें एक सीध में आ जाएँ। इसमें आँख निकाली नहीं जाती। उम्र के हिसाब से बेहोशी या सुन्न करने का तरीका चुना जाता है।
बड़ों का भेंगापन
बड़ों से अक्सर कह दिया जाता है कि बचपन का भेंगापन अब ठीक नहीं हो सकता। यह सही नहीं है। ऑपरेशन से बड़ों की आँखें भी सीधी की जा सकती हैं, और अगर बाद की उम्र में भेंगापन आया है और दो-दो दिख रहा है तो वह भी ठीक हो सकता है। बहुत सालों से कमज़ोर पड़ी आँख की रोशनी शायद वापस न आए — पर सीध वापस आ सकती है।
ध्यान दें: बड़ी उम्र में अचानक भेंगापन या अचानक दो-दो दिखना आँख के बाहर की किसी दिक्कत का संकेत भी हो सकता है। इसे टालें नहीं, तुरंत दिखाएँ।
आयुष्मान कार्ड से
भेंगापन का ऑपरेशन आयुष्मान भारत (PM-JAY) के नेत्र पैकेजों में आता है। कार्ड और आधार लेकर आइए — हमारी टीम पहले पात्रता जाँचती है, उसके बाद ही तारीख तय होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बच्चा बड़ा होकर अपने आप ठीक हो जाएगा?
नहीं। जन्म के पहले कुछ महीनों में कभी-कभार आँख का घूमना अपने आप ठीक हो सकता है। लेकिन लगभग चार महीने की उम्र के बाद भी भेंगापन दिख रहा है, या बाद में शुरू हुआ है, तो वह अपने आप ठीक नहीं होता।
क्या ऑपरेशन में दर्द होता है?
ऑपरेशन आँख के बाहर की छोटी मांसपेशियों पर होता है। आँख निकाली नहीं जाती। कुछ दिन हल्की लाली और चुभन रहना सामान्य है।
क्या बड़ी उम्र में देर हो चुकी होती है?
नहीं। बड़ों में भी ऑपरेशन से आँखें सीधी की जा सकती हैं।