सीधा जवाब: काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) एक गंभीर आंखों की बीमारी है जिसमें आंख का प्रेशर बढ़ जाता है और नज़र की नस धीरे-धीरे खराब हो जाती है। इसमें दर्द नहीं होता इसलिए पता नहीं चलता। समय पर इलाज न हो तो अंधापन हो सकता है।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) का इलाज — प्रयागराज

काला मोतियाबिंद, जिसे अंग्रेज़ी में ग्लूकोमा (Glaucoma) कहते हैं, आंखों की एक बहुत गंभीर बीमारी है। यह सफ़ेद मोतियाबिंद से बिल्कुल अलग है। सफ़ेद मोतियाबिंद में आंख का लेंस धुंधला हो जाता है और ऑपरेशन से ठीक हो जाता है, लेकिन काले मोतियाबिंद में आंख की नस (ऑप्टिक नर्व) को नुकसान होता है जो वापस नहीं आ सकता। इसलिए समय पर जांच और इलाज बेहद ज़रूरी है। इंदुमती नेत्रालय प्रयागराज में ग्लूकोमा की जांच और इलाज के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

काला मोतियाबिंद क्या है?

हमारी आंखों में एक पानी जैसा तरल पदार्थ (एक्वियस ह्यूमर) बनता रहता है जो आंख को पोषण देता है और आंख का आकार बनाए रखता है। सामान्य स्थिति में यह तरल बनता है और बराबर मात्रा में बाहर निकलता रहता है। लेकिन जब इस तरल के निकलने का रास्ता बंद हो जाता है या संकरा हो जाता है तो आंख के अंदर दबाव (इंट्राऑक्यूलर प्रेशर या IOP) बढ़ जाता है।

यह बढ़ा हुआ दबाव आंख के पीछे मौजूद ऑप्टिक नर्व (नज़र की नस) को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। ऑप्टिक नर्व आंख से दिमाग तक तस्वीर पहुंचाने का काम करती है। जब यह नस खराब होती है तो पहले किनारे की नज़र जाती है और धीरे-धीरे पूरी रोशनी चली जाती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि ग्लूकोमा में शुरुआत में कोई दर्द नहीं होता और नज़र भी धीरे-धीरे जाती है, इसलिए मरीज को पता ही नहीं चलता कि कुछ गड़बड़ है।

सफ़ेद और काले मोतियाबिंद में अंतर

बहुत से लोग सफ़ेद मोतियाबिंद और काले मोतियाबिंद को एक ही समझते हैं, लेकिन ये दोनों बिल्कुल अलग बीमारियां हैं। दोनों में अंतर समझना बहुत ज़रूरी है:

  • सफ़ेद मोतियाबिंद (Cataract): इसमें आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है। नज़र धीरे-धीरे कम होती है लेकिन ऑपरेशन से पूरी तरह ठीक हो जाती है। इसमें दर्द नहीं होता और कोई नर्व डैमेज नहीं होता।
  • काला मोतियाबिंद (Glaucoma): इसमें आंख का प्रेशर बढ़ता है और ऑप्टिक नर्व खराब होती है। जो नज़र एक बार गई वो वापस नहीं आती। इलाज से बीमारी को रोका जा सकता है लेकिन खोई हुई नज़र वापस नहीं आती।
  • इलाज का अंतर: सफ़ेद मोतियाबिंद का इलाज सिर्फ ऑपरेशन है और एक बार ऑपरेशन हो जाए तो दोबारा नहीं होता। काले मोतियाबिंद का इलाज आई ड्रॉप्स, लेज़र या ऑपरेशन से होता है लेकिन ज़िंदगी भर इलाज जारी रखना पड़ता है।

काला मोतियाबिंद के लक्षण

ग्लूकोमा को "खामोश चोर" कहा जाता है क्योंकि ज़्यादातर मामलों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते। लेकिन कुछ संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए:

  • किनारे की नज़र कम होना — सीधे देख सकते हैं लेकिन बगल से कुछ दिखना बंद हो जाता है
  • रात में गाड़ी चलाते समय रोशनी के चारों तरफ गोल छल्ले (हेलो) दिखना
  • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना
  • आंख में भारीपन या हल्का दर्द महसूस होना
  • सिरदर्द जो आंख के ऊपर ज़्यादा होता है
  • अचानक तेज दर्द, उल्टी और धुंधलापन — यह एक्यूट ग्लूकोमा अटैक का संकेत है जो एक इमरजेंसी है

अगर आपकी उम्र 40 साल से ज़्यादा है, परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा है, या आपको डायबिटीज़ है तो हर साल आंखों की जांच ज़रूर कराएं। शुरुआती दौर में ग्लूकोमा सिर्फ जांच से ही पकड़ में आता है।

जांच कैसे होती है?

इंदुमती नेत्रालय में ग्लूकोमा की जांच के लिए कई आधुनिक परीक्षण किए जाते हैं:

  • टोनोमेट्री (IOP टेस्ट): यह सबसे बुनियादी जांच है जिसमें आंख के अंदर का दबाव (प्रेशर) मापा जाता है। सामान्य प्रेशर 10 से 21 mmHg होता है। इंदुमती नेत्रालय में गोल्डमैन एप्लेनेशन टोनोमीटर और नॉन-कॉन्टैक्ट टोनोमीटर दोनों उपलब्ध हैं।
  • गोनियोस्कोपी: इसमें एक विशेष लेंस से आंख के अंदर पानी निकलने का रास्ता (ड्रेनेज एंगल) देखा जाता है। इससे पता चलता है कि ग्लूकोमा ओपन एंगल है या क्लोज़्ड एंगल।
  • OCT (ऑप्टिकल कोहरेंस टोमोग्राफी): यह एक अत्याधुनिक मशीन है जो ऑप्टिक नर्व और रेटिना की बहुत बारीक तस्वीरें लेती है। इससे नर्व को कितना नुकसान हुआ है यह सटीक रूप से पता चलता है।
  • विज़ुअल फील्ड टेस्ट (पेरीमेट्री): इसमें आपकी किनारे की नज़र की जांच होती है। एक स्क्रीन पर अलग-अलग जगह रोशनी दिखाई जाती है और आपको बटन दबाना होता है। जहां आपको रोशनी नहीं दिखती वहां नज़र का नुकसान हो चुका है।
  • पैकीमेट्री: इसमें कॉर्निया (आंख की बाहरी पारदर्शी परत) की मोटाई मापी जाती है। पतले कॉर्निया वाले लोगों में ग्लूकोमा का खतरा ज़्यादा होता है।

इलाज के विकल्प

ग्लूकोमा का इलाज बीमारी की स्टेज और गंभीरता पर निर्भर करता है। इंदुमती नेत्रालय में सभी तरह के इलाज उपलब्ध हैं:

आई ड्रॉप्स (दवाइयां)

ज़्यादातर मामलों में ग्लूकोमा का इलाज आई ड्रॉप्स से शुरू होता है। ये दवाइयां आंख का प्रेशर कम करती हैं — कुछ दवाइयां आंख में बनने वाले पानी को कम करती हैं और कुछ पानी के निकलने का रास्ता बेहतर बनाती हैं। ध्यान रखें कि ये दवाइयां रोज़ डालनी होती हैं और बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए। एक दिन भी दवाई छूटने से प्रेशर बढ़ सकता है।

लेज़र ट्रीटमेंट

अगर दवाइयों से प्रेशर नियंत्रित नहीं हो रहा है तो लेज़र ट्रीटमेंट किया जाता है। इसमें लेज़र की मदद से आंख के अंदर पानी निकलने का रास्ता खोला जाता है। यह प्रक्रिया OPD में ही होती है, भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती और 10-1 घंटा में हो जाती है। इंदुमती नेत्रालय में SLT (सिलेक्टिव लेज़र ट्रेबेक्यूलोप्लास्टी) और YAG लेज़र इरिडोटोमी दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं।

सर्जरी (ऑपरेशन)

गंभीर मामलों में या जब दवाइयां और लेज़र काम नहीं करते तो ऑपरेशन किया जाता है। ट्रेबेक्यूलेक्टोमी सबसे आम ऑपरेशन है जिसमें आंख में एक नया रास्ता बनाया जाता है जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। कुछ मामलों में ग्लूकोमा ड्रेनेज इंप्लांट भी लगाया जाता है।

इलाज का खर्चा

इंदुमती नेत्रालय में ग्लूकोमा के इलाज की कीमत इस प्रकार है:

इलाज कीमत आयुष्मान भारत
ग्लूकोमा जांच (IOP + OCT) ₹500-1,000 मुफ्त
विज़ुअल फील्ड टेस्ट ₹500 मुफ्त
लेज़र ट्रीटमेंट ₹3,000-5,000 मुफ्त
ट्रेबेक्यूलेक्टोमी सर्जरी ₹15,000-20,000 मुफ्त
मासिक आई ड्रॉप्स ₹200-800

इंदुमती नेत्रालय में ग्लूकोमा का इलाज

इंदुमती नेत्रालय प्रयागराज में ग्लूकोमा के इलाज के लिए सबसे भरोसेमंद नाम है। हमारे यहां ग्लूकोमा की जांच और इलाज के लिए कई विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं:

  • अनुभवी ग्लूकोमा विशेषज्ञ: हमारे नेत्र चिकित्सकों को ग्लूकोमा के इलाज का वर्षों का अनुभव है। वे हर मरीज की स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त इलाज योजना बनाते हैं।
  • आधुनिक उपकरण: OCT, ऑटोमेटिक पेरीमीटर, गोल्डमैन टोनोमीटर, पैकीमीटर — सभी अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं जिनसे सटीक जांच संभव है।
  • लेज़र सुविधा: SLT और YAG लेज़र की सुविधा उपलब्ध है जिससे मरीज को बार-बार आने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • फॉलो-अप सिस्टम: ग्लूकोमा में नियमित फॉलो-अप बहुत ज़रूरी है। हमारी टीम मरीजों को फ़ोन या WhatsApp पर फॉलो-अप की याद दिलाती है ताकि कोई अपॉइंटमेंट न छूटे।
  • किफायती इलाज: आयुष्मान भारत कार्ड धारकों के लिए जांच और इलाज मुफ्त है। बिना कार्ड वाले मरीजों के लिए भी कीमत बहुत वाजिब है।

ग्लूकोमा में सबसे ज़रूरी बात यह है कि समय पर जांच कराई जाए। 40 साल से ऊपर हर व्यक्ति को साल में एक बार आंखों का प्रेशर ज़रूर चेक कराना चाहिए। अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा है तो 30 साल की उम्र से ही जांच शुरू कर देनी चाहिए। याद रखें — ग्लूकोमा में जो नज़र एक बार गई वो वापस नहीं आती, लेकिन समय पर इलाज से बाकी नज़र बचाई जा सकती है।

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