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मोतियाबिंद का ऑपरेशन प्रयागराज — इंदुमती नेत्रालय

NABH एंट्री लेवल प्रमाणितआयुष्मान से मुफ्त ऑपरेशन
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सीधा जवाब: मोतियाबिंद का ऑपरेशन प्रयागराज में इंदुमती नेत्रालय में ₹4,999 से शुरू होता है। आयुष्मान भारत कार्ड धारकों के लिए पूरी तरह मुफ्त। ऑपरेशन में 15–20 मिनट लगते हैं और मरीज़ उसी दिन घर जा सकता है।

मोतियाबिंद (Cataract) आंखों की सबसे आम बीमारी है जो उम्र बढ़ने के साथ होती है। प्रयागराज और आसपास के ज़िलों में लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। इंदुमती नेत्रालय पिछले कई वर्षों से प्रयागराज में मोतियाबिंद के ऑपरेशन कर रहा है। अब तक 2,500 से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं। हमारे अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ आधुनिक तकनीक से दर्दरहित ऑपरेशन करते हैं, जिससे मरीज़ को जल्दी से जल्दी अपनी रोशनी वापस मिलती है।

मोतियाबिंद क्या है?

मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंख के अंदर का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है। यह लेंस आम तौर पर पारदर्शी होता है और रोशनी को रेटिना तक पहुंचाने का काम करता है। जब यह लेंस धुंधला हो जाता है, तो रोशनी ठीक से अंदर नहीं जा पाती और देखने में दिक्कत होने लगती है। यह बीमारी आम तौर पर 50 साल की उम्र के बाद शुरू होती है, लेकिन कभी-कभी डायबिटीज़, आंखों में चोट, या दवाइयों के कारण कम उम्र में भी हो सकती है।

भारत में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण मोतियाबिंद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोग मोतियाबिंद से पीड़ित हैं। उत्तर प्रदेश में यह संख्या सबसे अधिक है। प्रयागराज और आसपास के ज़िलों जैसे कौशाम्बी, फतेहपुर, और चित्रकूट में ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोग इलाज के अभाव में अंधेपन का शिकार हो जाते हैं। इंदुमती नेत्रालय इन्हीं लोगों की सेवा के लिए काम करता है।

मोतियाबिंद के लक्षण

मोतियाबिंद धीरे-धीरे बढ़ता है। शुरुआत में मरीज़ को पता भी नहीं चलता। लेकिन इन लक्षणों पर ध्यान दें:

  • धुंधला दिखाई देना — जैसे कांच पर धुंध जम गई हो
  • रात में देखने में ज़्यादा दिक्कत होना
  • रोशनी के चारों तरफ गोला (halo) दिखना
  • चश्मे का नंबर बार-बार बदलना
  • रंग फीके दिखाई देना — खासकर पीला या भूरा रंग
  • एक आंख से दो चीज़ें दिखना (double vision)
  • तेज़ रोशनी में आंखें चुंधिया जाना
  • पढ़ने में या बारीक काम करने में दिक्कत

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को ये लक्षण दिखें, तो तुरंत आंखों की जांच कराएं। इंदुमती नेत्रालय में आंखों की पूरी जांच सिर्फ ₹100 में होती है, और 50 साल से ऊपर के सभी मरीज़ों के लिए जांच मुफ्त है।

ऑपरेशन कैसे होता है?

मोतियाबिंद का इलाज सिर्फ ऑपरेशन से ही संभव है। कोई दवाई या चश्मा मोतियाबिंद को ठीक नहीं कर सकता। इंदुमती नेत्रालय में दो तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं:

1. फेको सर्जरी (Phacoemulsification)

यह सबसे आधुनिक और सुरक्षित तरीका है। इसमें आंख में सिर्फ 2.2mm का छोटा सा कट लगाया जाता है। अल्ट्रासाउंड तरंगों से धुंधले लेंस को तोड़कर बाहर निकाला जाता है और उसकी जगह एक नया कृत्रिम लेंस (IOL) लगाया जाता है। इस ऑपरेशन में टांके नहीं लगते, दर्द नहीं होता, और मरीज़ उसी दिन घर जा सकता है। ऑपरेशन में सिर्फ 15–20 मिनट लगते हैं। अगले दिन से मरीज़ साफ देखने लगता है।

2. SICS (Small Incision Cataract Surgery)

यह तरीका भी बहुत सुरक्षित है और खासकर उन मरीज़ों के लिए उपयुक्त है जिनका मोतियाबिंद बहुत पक गया हो। इसमें 6mm का कट लगाया जाता है। यह ऑपरेशन कम खर्चीला है और आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किया जाता है। ऑपरेशन के 2-3 दिन बाद मरीज़ सामान्य काम करने लगता है।

ऑपरेशन का खर्चा

इंदुमती नेत्रालय में मोतियाबिंद ऑपरेशन का खर्चा लेंस की क्वालिटी पर निर्भर करता है। नीचे विस्तृत जानकारी दी गई है:

सर्जरी का प्रकारलेंसकीमत (प्रति आंख)
आयुष्मान भारत / DBCSयोजना वाला लेंसमुफ्त
SICS — स्टैंडर्डनॉन-फोल्डेबल लेंस₹4,999
फेको — प्रीमियमफोल्डेबल लेंस₹9,500
फेको — एडवांस्डप्रीलोडेड फोल्डेबल लेंस₹12,500
फेको — इम्पोर्टेडइम्पोर्टेड / टोरिक / मल्टीफोकल लेंस₹15,500 से ₹85,000

सभी कीमतों में ऑपरेशन, लेंस, दवाइयां, और फॉलो-अप शामिल हैं। कोई छिपा हुआ खर्चा नहीं है। EMI की सुविधा भी उपलब्ध है।

आयुष्मान भारत से मुफ्त ऑपरेशन

इंदुमती नेत्रालय प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) यानी आयुष्मान भारत योजना के तहत एम्पैनल्ड अस्पताल है। अगर आपके पास आयुष्मान भारत कार्ड है, तो आप मोतियाबिंद का ऑपरेशन पूरी तरह मुफ्त करा सकते हैं। इसमें जांच, ऑपरेशन, लेंस, दवाइयां — सब कुछ शामिल है। मरीज़ को एक पैसा भी नहीं देना होता।

आयुष्मान भारत कार्ड से मुफ्त ऑपरेशन कराने के लिए ये दस्तावेज़ लेकर आएं:

  • आयुष्मान भारत कार्ड (गोल्डन कार्ड)
  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • एक पासपोर्ट साइज़ फोटो

अगर आपका आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, तो चिंता न करें। हमारे अस्पताल में आयुष्मान हेल्प डेस्क है जहां आपकी पात्रता जांची जाएगी और कार्ड बनाने में मदद की जाएगी। बहुत से मरीज़ जो राशन कार्ड की सूची में हैं, वे आयुष्मान कार्ड के लिए पात्र हैं लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती।

ऑपरेशन के बाद क्या करें?

मोतियाबिंद का ऑपरेशन सुरक्षित है, लेकिन ऑपरेशन के बाद कुछ सावधानियां ज़रूरी हैं ताकि आंख जल्दी ठीक हो:

  • डॉक्टर द्वारा दी गई आंख की ड्रॉप्स समय पर डालें
  • ऑपरेशन वाली आंख को हाथ से न छुएं और न रगड़ें
  • एक हफ्ते तक आंख में पानी न जाने दें
  • धूल-मिट्टी से बचें और बाहर जाते समय चश्मा लगाएं
  • भारी सामान न उठाएं और झुककर काम न करें
  • सोते समय आंख पर शील्ड (ढक्कन) लगाकर सोएं
  • डॉक्टर के बताए समय पर फॉलो-अप के लिए आएं — आम तौर पर अगले दिन, एक हफ्ते बाद, और एक महीने बाद

ज़्यादातर मरीज़ ऑपरेशन के अगले दिन से ही साफ देखने लगते हैं। पूरी तरह ठीक होने में 4-6 हफ्ते लगते हैं। इस दौरान डॉक्टर की सलाह का पालन करना बहुत ज़रूरी है।

इंदुमती नेत्रालय क्यों?

प्रयागराज में कई आंखों के अस्पताल हैं, लेकिन इंदुमती नेत्रालय को चुनने के कई कारण हैं:

  • NABH एंट्री लेवल प्रमाणित अस्पताल: राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुसार इलाज
  • अनुभवी डॉक्टर: MS, DNB डिग्री वाले विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सक
  • आधुनिक उपकरण: लेटेस्ट फेको मशीन, OCT, और अन्य डायग्नोस्टिक उपकरण
  • 2,500+ सर्जरी: मोतियाबिंद और अन्य आंखों की सर्जरी का अनुभव
  • किफायती इलाज: ₹4,999 से शुरू, आयुष्मान भारत से मुफ्त
  • मुफ्त आंखों के कैंप: ग्रामीण इलाकों में नियमित रूप से मुफ्त जांच कैंप
  • पारदर्शी बिलिंग: कोई छिपा हुआ खर्चा नहीं, सब कुछ पहले बताया जाता है

इंदुमती नेत्रालय सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि प्रयागराज और आसपास के ज़िलों के लोगों की आंखों की रोशनी बचाने का एक मिशन है। आयुष्मान भारत और इंदुमती चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से हज़ारों मरीज़ों का मुफ्त ऑपरेशन किया गया है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति पैसों की कमी के कारण अंधेपन का शिकार न हो।

अस्पताल प्रयागराज के मेजा रोड पर स्थित है। यहां बस, ऑटो, और निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। अस्पताल में पर्याप्त पार्किंग की सुविधा है। मरीज़ों के साथ आए परिवार के सदस्यों के बैठने की व्यवस्था भी है।

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